आरती श्री राम चंद्र जी की (Ramchandra Ji Arti)

आरती श्री राम चंद्र जी की (Ramchandra Ji Arti)

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आरती श्री राम चंद्र जी की

श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्।

नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।

कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।

पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।

भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।

रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।

सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।

आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।

इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।

मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।

छंद :

मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।

करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।

एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।

तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।

।।सोरठा।।

जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।

मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।

Ritesh Kumar

रितेश कुमार, भजन रस में भजन और कथाएं और पंचांग सेक्शन लीड कर रहे हैं। उन्हें कामकाज में करीब 5 साल का अनुभव है। इन्हें आध्यात्मिकता क्षेत्र कवर करने का अच्छा अनुभव रहा है। थिएटर के संपादक रह चुके रितेश ने टीवी से लेकर अखबार और देश की विभिन्न विख्यात वेबसाइटों के साथ काम किया है। इन लोगों ने राष्ट्रीय स्तर की प्रामाणिकता का वीडियो और प्रिंट साक्षात्कार भी लिया है। रितेश ने अपनी शिक्षा शिक्षा लखनऊ से प्राप्त करने के बाद नई दिल्ली से टीवी सत्र की पढ़ाई पूरी की है।

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